जल्द बनकर तैयार होगा दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, जहां से साफ दिखेगा ताज महल, नाम है चंद्रोदय

जल्द बनकर तैयार होगा दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, जहां से साफ दिखेगा ताज महल, नाम है चंद्रोदय

वैसे तो भगवान राम की नगरी अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो ही रहा है. लेकिन इसके साथ ही भगवान कृष्ण की नगरी में भी एक मंदिर बन रहा है. इस मंदिर को दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर बताया जा रहा है. इतना ही नहीं दावा यह भी किया जा रहा है कि इस मंदिर के एक छोर से टेलिस्कोप के जरिए खूबसूरत ताज का भी दीदार हो सकेगा. यह मंदिर वृंदावन के लिहाज से एक अहम धार्मिक आकर्षण का केंद्र माना जा रहा है. इसका काम काफी जोर शोर से जारी है. इसका नाम चंद्रोदय मंदिर रखा गया है. इसकी नींव की गहराई बुर्ज खलीफा से भी ज्यादा है.

दरअसल, भगवान कृष्ण की जन्म भूमि मथुरा के वृंदावन में यह मंदिर बन रहा है. इसे दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर बताया जा रहा है. इतना ही नहीं यह मंदिर जितना ऊंचा होगा उतना ही भव्य और सुंदर भी होगा. यह मंदिर कुतुब मीनार से भी तीन गुना अधिक ऊंचा होगा. मंदिर की नींव दुनिया की सबसे उंची इमारत बुर्ज खलीफा से भी तीन गुना ज्यादा गहरी होगी. मंदिर अगले साल तक पूरा हो जानी की उम्मीद जताई जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मंदिर को इस्‍कॉन यानि अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ बना रहा है. इसका शिलान्यास 16 नवम्बर 2014 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने किया था.

इस मंदिर की खूबियों की बात करें तो इसमें लगभग 166 मंजिलें होंगी. मंदिर के चारों ओर 12 आर्टिफिशियल फॉरेस्ट बनाए जा रहे हैं. इन्हें श्रीमद्भागवत और अन्य शास्त्रों में वर्णन किए गए 12 वनों (द्वादशकानन) के मुातबिक ही बनाया जाएगा. इस मंदिर के निर्माण का खर्च 500 करोड़ से भी ज्यादा का है. वृंदावन का यह चंद्रोदय मंदिर पिरामिड के आकार में बनाया जा रहा है. मंदिर निर्माण का काम युद्ध स्तर पर जारी और आधे से ज्यादा काम खत्म किया जा चुका है.

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक 70 मंजिला चंद्रोदय मंदिर 210 मीटर ऊंचा होगा. इसके अलावा मंदिर की गहराई 55 है जो बुर्ज खलीफा से भी 5 मीटर अधि‍क है. मंदिर को 8 रिक्टर स्केल से अधिक तीव्रता का भूकंप भी नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा. चंद्रोदय मंदिर 170 किलोमीटर की तीव्रता के तूफान को भी झेलने में सक्षम होगा. मंदिर करीब 70 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें 12 एकड़ पर कार-पार्किंग सुविधा होगी, और एक हेलीपैड भी बनाया जाएगा. खास बात यह है कि मंदिर को पारंपरिक नागरा वास्तुशैली और आधुनिक वास्तुशैली को मिलाकर बनाया जाता है.

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